Poetry Archive

फिर से माँ की याद आई !!

थक कर जब घर को चला, ना घर पे जब कोई मिला ! अधूरे मन से रोटी बनाई, फिर से माँ की याद आई !! अपनों से मेरी दूरी ये, कुछ कमाने की मजबूरी ये ! सपनो

तुम फिर भी आस पास हो..

जैसे बारिश की बूंद को पलकों पे संजोया है, मैंने तेरे एहसास को कुछ यूँ खुद में पिरोया है ! मेरी बातों में है बातें तेरी, प्यारी सी मुलाकातें तेरी ! तुम प्यार भरी इक चाहत से,

आशा का दीपक हूँ …

**** क्या कहता है दीपावली का दीपक **** आशा का दीपक हूँ मैं, मुझे यूहीं जलाये रखना! अपने दिलों में सदा, तुम प्यार बनाये रखना! ज़रा ज़रा सी बात पे, क्यूँ अपनों से नाराज हो! कुछ पल

सारे जग से न्यारा देश मेरा..

सारे जग से न्यारा देश मेरा, मेरी आँखों का तारा देश मेरा! भगत सिंह और बोस यहाँ, है इनके जैसा जोश कहाँ! गीत है तेरी फ़िज़ाओं में, है खुशबू बिखरी हवाओ में! गांधी, नेहरू, लाल बहादुर, आये

Aazadi hai kya…

Aankhon me kuch sapne ho, Sapne tumhare apne ho, Aakash me udane ki tamanna ho, Kahin girne ka dar na ho, Kuch ye aankhen kehti ho, Kuch pane ko betab rehti ho !!!   Teri apni manzillein