तुम फिर भी आस पास हो..

जैसे बारिश की बूंद को
पलकों पे संजोया है,
मैंने तेरे एहसास को
कुछ यूँ खुद में पिरोया है !

मेरी बातों में है बातें तेरी,
प्यारी सी मुलाकातें तेरी !

तुम प्यार भरी इक चाहत से,
तुम फूलों की मुस्कुराहट से !

सागर की लहरों के जैसे,
तुम खास इक एहसास हो!
माना थोड़ी सी दूरी है,
तुम फिर भी आस पास हो !
तुम फिर भी आस पास हो !!

तुम फिर भी आस पास हो

तुम फिर भी आस पास हो

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